“नमक का उपयोग करने के नियम: सेंधा नमक और अड्डों नमक की तुलना”

आयोडीन नमक कभी ना खाएं

1. आयोडीन नमक कभी ना खाएं नमक हमेशा सेंधा या काला खाएं। हाई बीपी और लो बीपी दोनों में नमक औषधि है। जिनका ब्लड प्रेशर ऊंचा है उन्हें समुद्र स्नान करना चाहिए या स्नान करते समय पानी में समुद्री नमक या सेंधा नमक मिला दें। कम से कम 15 से 20 दिन तक साबुन न लगाएं। जिनका ब्लड प्रेशर लो है उन्हें सेंधा नमक पानी में मिलाकर पीना चाहिए।

2. आयोडीन नमक नपुंसकता लाता है भारत को छोड़कर दुनिया के सभी देशों में आयोडीन नमक बंद है। आयोडीन नमक से कंपल्शन (अनिवार्यता) हट गया है इसीलिए आप सेंधा नमक या काला नमक खा सकते हैं। आयोडीन नमक खाने से डेनमार्क के बच्चे पैदा नहीं होते हैं वहां ज्यादा बच्चे फायदा करने पर सरकार द्वारा इनाम मिलता है।

भारत में जनसंख्या कम करने की जरूरत नहीं है, जरूरत है संसाधनों का सही बटवारा करने की

3. भारत में जनसंख्या कम करने की जरूरत नहीं है, जरूरत है संसाधनों का सही बटवारा करने की।

4. सेंधा नमक सबसे ज्यादा बिष को कम करता है काला नमक भी बिष को कम करता है भोजन पकाते समय सेंधा नमक ही प्रयोग करें सेंधा नमक डाला हुआ खाना खाने के बाद दूध का सेवन किया जा सकता है ब्रह्मचारी लोगों के लिए सेंधा नमक और काला नमक सबसे अच्छा होता है हल्दी भी सामान से थोड़ी सी ज्यादा मात्रा में डालना चाहिए जिससे जहर थोड़ा और कम हो जाएगा। सबसे ज्यादा सोडियम सेंधा नमक और काले नमक से मिलता है। सोडियम की थोड़ी सी कमी लकवे का कारण हो सकती है सोडियम की कमी से आवाज भी जा सकती है।

5. समुंद्री या आयोडीन नमक में 3 से 4 सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो शरीर को काम आते हैं। सेंधा नमक में 94 पोषक तत्व है जो शरीर के काम आते हैं। समुंदर का पानी मनुष्य के अनुकूल नहीं है जिसके कारण समुद्री नमक भी शरीर के अनुकूल नहीं है। अतः शरीर की साड़ी आसमान जटिलताएं बढ़ती है। समुंदर के सभी नमक रक्तचाप बढ़ाने वाले हैं समुद्री नमक का चलन मात्र 60 साल पहले से ही शुरू हुआ है।

6. दैनिक आहार में शरीर को आवश्यक आयोडीन की मांग की पूर्ति हो जाती है अर्थात अतिरिक्त आयोडीन की आवश्यकता शरीर को नहीं पड़ती है। क्योंकि आयोडीन की मांग शरीर में अधिक होने की स्थिति से नपुंसकता बढ़ती है।

7. नमक को फ्री फ्लो बनाने के लिए नमक की नमी को निकाला जाता है और नमक का गुण नहीं है कि वह नमी को धारण करें। नमी को निकालने के लिए एलुमिनियम सिलीकेट केमिकल डालते हैं जो की बहुत ही खतरनाक है। दूसरा केमिकल पोटैशियम आयोडेट जो अप्राकृतिक है। यह दोनों केमिकल हमारे शरीर में बहुत सी जटिलताओं को जन्म देते हैं। ठंडे देशों में आयोडीन नमक की जरूरत होती है।

सेंधा नमक सबसे ज्यादा बिष को कम करता है काला नमक भी बिष को कम करता है भोजन पकाते समय सेंधा नमक ही प्रयोग करें सेंधा नमक डाला हुआ खाना खाने के बाद दूध का सेवन किया जा सकता है ब्रह्मचारी लोगों के लिए सेंधा नमक और काला नमक सबसे अच्छा होता है हल्दी भी सामान से थोड़ी सी ज्यादा मात्रा में डालना चाहिए जिससे जहर थोड़ा और कम हो जाएगा। सबसे ज्यादा सोडियम सेंधा नमक और काले नमक से मिलता है। सोडियम की थोड़ी सी कमी लकवे का कारण हो सकती है सोडियम की कमी से आवाज भी जा सकती है।

समुंद्री या आयोडीन नमक में 3 से 4 सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो शरीर को काम आते हैं। सेंधा नमक में 94 पोषक तत्व है जो शरीर के काम आते हैं। समुंदर का पानी मनुष्य के अनुकूल नहीं है जिसके कारण समुद्री नमक भी शरीर के अनुकूल नहीं है। अतः शरीर की साड़ी आसमान जटिलताएं बढ़ती है। समुंदर के सभी नमक रक्तचाप बढ़ाने वाले हैं समुद्री नमक का चलन मात्र 60 साल पहले से ही शुरू हुआ है।