“भारतीय भौगोलिक और जीवन शैली के अनुसार दिनचर्या और श्रम का महत्व”

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भारतीय भौगोलिक और जीवन शैली

1. भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल अपनी दिनचर्या बनाएं। मतलब आप जहां रहते हो वहां की तासीर के हिसाब से अपनी दिनचर्या को ढा़लें।

2. तेल स्थानीय वातावरण और तसीर के हिसाब से होना चाहिए, गर्म इलाकों में (दक्षिण भारत में) ठंडा तेल अच्छा होता है। सबसे ठंडा तेल घानी से निकालने वाले वाला नारियल का तेल है। उत्तर भारत में सरसों का तेल सबसे अच्छा होता है। हरियाणा, पंजाब और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए तीन का तेल सबसे अच्छा होता है।

3. मेवा या ड्राईफ्रूट खा सकते हैं लेकिन जलवायु और तासीर के हिसाब से। अखरोट ठंड में रहने वाले लोगों को खाना चाहिए, काजू जम्मू कश्मीर के लोगों को खाना चाहिए। केसर दिसंबर, जनवरी,फरवरी से आगे ना खाएं।

4. मनुष्य के अतिरिक्त किसी भी जीव जंतु की परंपरिक क्रियाओं और दिनचर्या की क्रियाओं में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। चाहे वह कोई भी युग रहा हो ।यहां तक कि आज के 21वीं सदी में भी उनके जीवन शैली में कुछ नहीं बदला है।

जीवन शैली के अनुसार दिनचर्या और श्रम का महत्व

5. भारतीय वास्तु के अनुसार घर में स्थान जितना खुला होगा आपका दिन और दिमाग उतना ही खुला होगा और घर में स्थान जितना घिरा हुआ होगा, दिल और दिमाग उतना ही संकुचित होगा।

6. भारतीय भौगोलिक और जीवन शैली के अनुसार , परंपरा वहीं विकसित होती है जहां मौसम और जलवायु के हिसाब से चीजें व्यवस्थित होती है।

शरीर श्रम की आवश्यकता

जन्म से 18 साल तक खेलना ही श्रम है। 18 साल से 60 साल तक श्रम थोड़ा-थोड़ा बढ़ाएं। शारीरिक श्रम को 60 साल तक कम मत कीजिए। 60 साल के बाद श्रम को कम करते जाइए।

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अपनी दिनचर्या

1. भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल अपनी दिनचर्या बनाएं। मतलब आप जहां रहते हो वहां की तासीर के हिसाब से अपनी दिनचर्या को ढा़लें।

2. भारतीय भौगोलिक और जीवन शैली के अनुसार तेल स्थानीय वातावरण और तसीर के हिसाब से होना चाहिए, गर्म इलाकों में (दक्षिण भारत में) ठंडा तेल अच्छा होता है। सबसे ठंडा तेल घानी से निकालने वाले वाला नारियल का तेल है। उत्तर भारत में सरसों का तेल सबसे अच्छा होता है। हरियाणा, पंजाब और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए तीन का तेल सबसे अच्छा होता है।

3. मेवा या ड्राईफ्रूट खा सकते हैं लेकिन जलवायु और तासीर के हिसाब से। अखरोट ठंड में रहने वाले लोगों को खाना चाहिए, काजू जम्मू कश्मीर के लोगों को खाना चाहिए। केसर दिसंबर, जनवरी,फरवरी से आगे ना खाएं।

4. भारतीय भौगोलिक और जीवन शैली के अनुसार मनुष्य के अतिरिक्त किसी भी जीव जंतु की परंपरिक क्रियाओं और दिनचर्या की क्रियाओं में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। चाहे वह कोई भी युग रहा हो ।यहां तक कि आज के 21वीं सदी में भी उनके जीवन शैली में कुछ नहीं बदला है।

5. भारतीय वास्तु के अनुसार घर में स्थान जितना खुला होगा आपका दिन और दिमाग उतना ही खुला होगा और घर में स्थान जितना घिरा हुआ होगा, दिल और दिमाग उतना ही संकुचित होगा।

6. परंपरा वहीं विकसित होती है जहां मौसम और जलवायु के हिसाब से चीजें व्यवस्थित होती है।

शरीर श्रम की आवश्यकता

जन्म से 18 साल तक खेलना ही श्रम है। 18 साल से 60 साल तक श्रम थोड़ा-थोड़ा बढ़ाएं। शारीरिक श्रम को 60 साल तक कम मत कीजिए। 60 साल के बाद श्रम को कम करते जाइए।

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भारतीय

भारतीय भौगोलिक और जीवन शैली

1. भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल अपनी दिनचर्या बनाएं। मतलब आप जहां रहते हो वहां की तासीर के हिसाब से अपनी दिनचर्या को ढा़लें।

2. तेल स्थानीय वातावरण और तसीर के हिसाब से होना चाहिए, गर्म इलाकों में (दक्षिण भारत में) ठंडा तेल अच्छा होता है। सबसे ठंडा तेल घानी से निकालने वाले वाला नारियल का तेल है। उत्तर भारत में सरसों का तेल सबसे अच्छा होता है। हरियाणा, पंजाब और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए तीन का तेल सबसे अच्छा होता है।

3. मेवा या ड्राईफ्रूट खा सकते हैं लेकिन जलवायु और तासीर के हिसाब से। अखरोट ठंड में रहने वाले लोगों को खाना चाहिए, काजू जम्मू कश्मीर के लोगों को खाना चाहिए। केसर दिसंबर, जनवरी,फरवरी से आगे ना खाएं।

4. मनुष्य के अतिरिक्त किसी भी जीव जंतु की परंपरिक क्रियाओं और दिनचर्या की क्रियाओं में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। चाहे वह कोई भी युग रहा हो ।यहां तक कि आज के 21वीं सदी में भी उनके जीवन शैली में कुछ नहीं बदला है।

5. भारतीय वास्तु के अनुसार घर में स्थान जितना खुला होगा आपका दिन और दिमाग उतना ही खुला होगा और घर में स्थान जितना घिरा हुआ होगा, दिल और दिमाग उतना ही संकुचित होगा।

6. परंपरा वहीं विकसित होती है जहां मौसम और जलवायु के हिसाब से चीजें व्यवस्थित होती है।

शरीर श्रम की आवश्यकता

जन्म से 18 साल तक खेलना ही श्रम है। 18 साल से 60 साल तक श्रम थोड़ा-थोड़ा बढ़ाएं। शारीरिक श्रम को 60 साल तक कम मत कीजिए। 60 साल के बाद श्रम को कम करते जाइए।

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1. भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल अपनी दिनचर्या बनाएं। मतलब आप जहां रहते हो वहां की तासीर के हिसाब से अपनी दिनचर्या को ढा़लें।

2. तेल स्थानीय वातावरण और तसीर के हिसाब से होना चाहिए, गर्म इलाकों में (दक्षिण भारत में) ठंडा तेल अच्छा होता है। सबसे ठंडा तेल घानी से निकालने वाले वाला नारियल का तेल है। उत्तर भारत में सरसों का तेल सबसे अच्छा होता है। हरियाणा, पंजाब और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए तीन का तेल सबसे अच्छा होता है।

3. मेवा या ड्राईफ्रूट खा सकते हैं लेकिन जलवायु और तासीर के हिसाब से। अखरोट ठंड में रहने वाले लोगों को खाना चाहिए, काजू जम्मू कश्मीर के लोगों को खाना चाहिए। केसर दिसंबर, जनवरी,फरवरी से आगे ना खाएं।

4. मनुष्य के अतिरिक्त किसी भी जीव जंतु की परंपरिक क्रियाओं और दिनचर्या की क्रियाओं में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। चाहे वह कोई भी युग रहा हो ।यहां तक कि आज के 21वीं सदी में भी उनके जीवन शैली में कुछ नहीं बदला है।

5. भारतीय वास्तु के अनुसार घर में स्थान जितना खुला होगा आपका दिन और दिमाग उतना ही खुला होगा और घर में स्थान जितना घिरा हुआ होगा, दिल और दिमाग उतना ही संकुचित होगा।

6. परंपरा वहीं विकसित होती है जहां मौसम और जलवायु के हिसाब से चीजें व्यवस्थित होती है।

शरीर श्रम की आवश्यकता

जन्म से 18 साल तक खेलना ही श्रम है। 18 साल से 60 साल तक श्रम थोड़ा-थोड़ा बढ़ाएं। शारीरिक श्रम को 60 साल तक कम मत कीजिए। 60 साल के बाद श्रम को कम करते जाइए।