भोजन पकाने का नियम: संसाधन की सटीकता

भोजन पकाने का नियम: संसाधन की सटीकता

1. भोजन को पकाते समय सूरज का प्रकाश एवं पवन का स्पर्श ना मिले तो वह भोजन कभी मत करना। वह भोजन धीमा जहर है। भोजन को पकाते समय सूरज का प्रकाश और पवन का असर जरूर होना चाहिए। भोजन को पकाते समय अधिक से अधिक प्राणवायु (ऑक्सीजन) भोजन द्वारा शोषित हो जिससे वह भोजन आपके शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगा।

प्रेशर कुकर का भोजन ना करें

2. प्रेशर कुकर का भोजन ना करें। ज्यादातर प्रेशर कुकर एल्युमिनियम के बने होते हैं और एल्युमिनियम खाना पकाने, रखने और खाने की दृष्टि से सबसे खराब धातु है। एल्युमिनियम के बर्तन का खाना बार-बार खाने से डायबिटीज ,अर्थराइटिस ,ब्रोंकाइटिस ,टीवी, अस्थमा आदि इसी तरह की 48 बीमारियां हो सकती है। ऐसा वैज्ञानिक लोग कहते हैं

3. वैज्ञानिक के अनुसार प्रेशर कुकर खाने को पकाने के लिए उस पर अतिरिक्त दबाव डालता है प्रेशर कुकर में भोजन वक्ता नहीं है बल्कि दबाव से टूट जाता है प्रेशर कुकर में पकाए हुए भोजन में सिर्फ 3% माइक्रो न्यूट्रिएंट्स बसते हैं। मॉलिक्यूल्स टूट जाते हैं, पकते नहीं है ।

4. एल्युमिनियम के बर्तन का खाना खाने से शरीर की प्रतिकारक क्षमता कम होती है। 100 साल 125 साल पहले से एल्युमिनियम भारत में आया है। एलुमिनियम भारी तत्व है जो शरीर में इकट्ठा होता रहता है,एस्क्रिटा सिस्टम जो जहर को बाहर निकालने का तंत्र है वो एल्युमिनियम को कभी भी बाहर नहीं निकाल पाता और बाद में दमा, अस्थमा, ट्यूबरक्लोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में एलुमिनियम वर्जित है। कैंसर तक की बीमारियां प्रेशर कुकर से होती है। किडनी फेल होने का कारण एल्युमिनियम के बर्तन भी है।

5. एल्युमिनियम के बर्तन टीवी होने का सबसे बड़ा कारण है। भारत में सरकारी आंकड़े बताते हैं कि यहां सबसे ज्यादा मृत्यु टीवी के बीमारी के कारण होती है। और सबसे ज्यादा मरीज भारत में टीवी की बीमारी के ही है।

6. शरीर की ऐसी अवस्था है जिसमें हल्की धातुएं शरीर से बाहर निकल जाती हैं और भारी धातुएं शरीर के बाहर नहीं निकल पाती हैं अर्थात शरीर में ही जमा होती रहती है। अतः एल्युमिनियम भारी धातु है जो कि शरीर में जमा होती रहती है। शरीर से बाहर नहीं निकलती है। इसी प्रकार के केमिकल है। आर्सेनिक, पारा (लेड) आदि।

7. रेफ्रीजरेटर की कोई भी चीज ना खाए ना पिए क्योंकि रेफ्रिजरेटर में न पवन का स्पर्श होता है और न ही सूरज का प्रकाश लगता है। रेफ्रिजरेटर ऐसी 12 गैसों का इस्तेमाल प्राकृतिक के नियमों के विरुद्ध तापमान कम करने में करता है। जिसको वैज्ञानिक की भाषा में CFC कहते हैं। क्लोरो – फ्लोरो कार्बन, जिसमें क्लोरीन भी है, फ्लोरीन भी और कार्बन डाइऑक्साइड भी है। रसायन शास्त्र के शब्दकोश में क्लोरीन मतलब जहर, फ्लोरीन मतलब अत्यंत जहर ,और कार्बन डाइऑक्साइड का मतलब अत्याधिक से भी अत्यंत जहाज। यही कार्य AC भी करता है।

8. रेफ्रिजरेटर ये तीनों गैसें लगातार छोड़ता है और ऐसी ही कुल 12 गैंसे छोड़ता है इसलिए इस में रखी हुई हर एक वस्तु इन्हीं गैसों के प्रभाव से रहती है। यह गैंसे इतनी तीव्र होती हैं कि स्टील के बर्तनों में से भी निकल जाती है। फ्रीज में रखी हुई कोई भी वस्तु यदि आप खा रहे हैं तो आप धीमा जहर खा रहे हैं। रेफ्रिजरेटर का आविष्कार ठंडे देशों में प्रयोग के लिए हुआ था।

माइक्रोवेव ओवन का कभी भी कुछ न खाना।

9. माइक्रोवेव ओवन का कभी भी कुछ न खाना। माइक्रोवेव ओवन में जब आप कोई चीज रखते हैं, गरम करने के लिए उस वस्तु का एक ही हिस्सा गर्म होता है। कोई भी वस्तु सभी तरह से बराबर गर्म होनी चाहिए। माइक्रोवेव ओवन भी ठंडे देशों के लिए है। ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए सभी को फ्रीज का इस्तेमाल कम या बंद करना पड़ेगा।