“नाक से खून बहने के घरेलू उपाय: बच्चों में नकसीर का इलाज”

नाक में चोट लग जाने से या किसी प्रकार के संक्रामक रोग से अथवा सिर की गर्मी से अक्सर नाक में खून निकलने लगता है। बच्चों में यह बीमारी अधिकांश देखी जाती है। इसको ठीक करने के घरेलू उपचार निम्नलिखित है:-

— सबसे पहले रोगी को सीधा लिटाकर ठंडा पानी से सिर धोएं। उससे खून निकलना बंद होगा।

— धनिया के पत्तों का रस या प्याज का रस नाक में डालने से खून निकलना बंद हो जाता है।

— आंवला पीसकर घी में भून और नाक पर लेप करें।

— दूध में केला मत कर खाने से काफी लाभ होता है।

— रात में भिगोई हुई मुल्तानी मिट्टी का लेप नाक पर लगाने से नकसीर बंद होती है।

— नींबू के रस में थोड़ा आंवला का रस मिलाकर नाक में डालने से नकसीर बंद होती है।

— रोगी को छाछ और दही की लस्सी पिलाने से आराम मिलता है।

— प्याज के रस को गर्म करके नाक में डालने से आराम मिलता है।

— आंवला तथा मूलहट्टी को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनाएं और गाय के दूध के साथ सुबह शाम एक-एक चम्मच सेवन करें।

— नाक के बाहर फिटकरी का लिफ्ट लगाने से भी नकसीर बंद होती है।

“लकवा (पक्षाघात) से बचाव और घरेलू उपाय: आपके स्वास्थ्य के लिए उपयोगी सुझाव”

लकवा /पक्षाघात होने पर रोगी का आधा शरीर संवेदनशील हो जाता है। पेट में अधिक गैस बनने, मस्तिष्क पर वायु का दबाव पड़ने और हृदय पर वायु का दबाव पढ़ने से शरीर पर वायु का झटका लगता है। उसी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति लकवे का शिकार हो जाता है। स्नायु शिथिल हो जाते हैं। शरीर का आधा भाग टेढ़ा हो जाता है। उस भाग में सुन्नता रहती है तथा छूने पर कोई संवेदना नहीं होगी। दिमाग भी काम करना कम कर देता है।

1.लकवा (पक्षाघात) से बचाव और घरेलू उपाय

लकवा /पक्षाघात होने पर रोगी का आधा शरीर संवेदनशील हो जाता है। पेट में अधिक गैस बनने, मस्तिष्क पर वायु का दबाव पड़ने और हृदय पर वायु का दबाव पढ़ने से शरीर पर वायु का झटका लगता है। उसी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति लकवे का शिकार हो जाता है। स्नायु शिथिल हो जाते हैं। शरीर का आधा भाग टेढ़ा हो जाता है। उस भाग में सुन्नता रहती है तथा छूने पर कोई संवेदना नहीं होगी। दिमाग भी काम करना कम कर देता है।
Hispanic male doctor examining patient with stethoscope at hospital

लकवा /पक्षाघात होने पर रोगी का आधा शरीर संवेदनशील हो जाता है। पेट में अधिक गैस बनने, मस्तिष्क पर वायु का दबाव पड़ने और हृदय पर वायु का दबाव पढ़ने से शरीर पर वायु का झटका लगता है। उसी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति लकवे का शिकार हो जाता है। स्नायु शिथिल हो जाते हैं। शरीर का आधा भाग टेढ़ा हो जाता है। उस भाग में सुन्नता रहती है तथा छूने पर कोई संवेदना नहीं होगी। दिमाग भी काम करना कम कर देता है। इसके घरेलू नुस्खे निम्नलिखित है:-

  1. Rhus. Tox.-30,15-15 मिनट पर तीन बार दो दो बूंद जीभ पर दें। कम से कम एक महीने तक सुबह दोपहर शाम।

2. चाय कॉफी

2. Causticum -1M, दूसरे दिन दो-दो बूंद 3 बार दे आधे घंटे या पौने घंटे के अंतर पर। हफ्ते में 1 दिन देनी चाहिए। दो-तीन महीने में पूरी तरह ठीक हो सकता है। हमेशा शाकाहारी भोजन दें। चाय कॉफी कभी मत दें।

3.गाय के घी

3. गाय का घी दो-दो बूंद रात में सोते समय थोड़ा गर्म करके डाल दे। मास्तिष्क में जमा हुआ खून को निकालने की ताकत गाय के घी में है।

4. राई और अकरकरा को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाएं और उसे शहर में मिलाकर पेस्ट बनाएं और दिन में तीन बार जीभ पर मले लकवा की शिकायत दूर होगी।

गाय के दूध,लहसुन

5. 250 मिली लीटर गाय के दूध में 8-10 लहसुन की कलियां डालकर उबालें। गाढ़ा होने पर रोगी को पिलाएं। बीमारी में आराम मिलेगा।

6. साउथ और औरत उबालकर उसका पानी पीने से लकवे में काफी लाभ होता है।

कपास की जड़, शहद

7. एक चम्मच कपास की जड़ का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है।

8. लहसुन के 5-6 कच्ची कलियों को पीसकर शहद में मिलाकर चाटें।

group of doctors walking in corridor
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उड़द, कौंच के बीज, एरंड की जड़, बला, हींग, सेंधा नमक और शहद

9. उड़द+ कौंच के बीज+ एरंड की जड़+ बला+ हींग+ सेंधा नमक और थोड़ा शहद सभी बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाएं और रोगी को पिलाएं ।बीमारी में आराम मिलेगा।

10. 250 ग्राम सरसों के तेल में थोड़ी काली मिर्च पीसकर डालें और मालिश करें।

11. सन के बीजों का चूर्ण शहद में मिलाकर रोगी को चटायें ,लाभ मिलेगा।

कुचले के पत्तों, सांभर का सींग तथा सौंठ तीनों बराबर मात्रा में लेकर पानी में पिएं और लकवे वाले स्थान पर लगाएं।

तुलसी,सेंधा नमक और दही

12. तुलसी के 8-10 पत्ते, सेंधा नमक और दही की चटनी बनाकर लकवे वाले स्थान पर लेख करें।

लकवा /पक्षाघात होने पर रोगी का आधा शरीर संवेदनशील हो जाता है। पेट में अधिक गैस बनने, मस्तिष्क पर वायु का दबाव पड़ने और हृदय पर वायु का दबाव पढ़ने से शरीर पर वायु का झटका लगता है। उसी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति लकवे का शिकार हो जाता है। स्नायु शिथिल हो जाते हैं। शरीर का आधा भाग टेढ़ा हो जाता है। उस भाग में सुन्नता रहती है तथा छूने पर कोई संवेदना नहीं होगी। दिमाग भी काम करना कम कर देता है। इसके घरेलू नुस्खे निम्नलिखित है:-

— Rhus. Tox.-30,15-15 मिनट पर तीन बार दो दो बूंद जीभ पर दें। कम से कम एक महीने तक सुबह दोपहर शाम।

— Causticum -1M, दूसरे दिन दो-दो बूंद 3 बार दे आधे घंटे या पौने घंटे के अंतर पर। हफ्ते में 1 दिन देनी चाहिए। दो-तीन महीने में पूरी तरह ठीक हो सकता है। हमेशा शाकाहारी भोजन दें। चाय कॉफी कभी मत दें।

— गाय का घी दो-दो बूंद रात में सोते समय थोड़ा गर्म करके डाल दे। मास्तिष्क में जमा हुआ खून को निकालने की ताकत गाय के घी में है।

— राई और अकरकरा को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाएं और उसे शहर में मिलाकर पेस्ट बनाएं और दिन में तीन बार जीभ पर मले लकवा की शिकायत दूर होगी।

— 250 मिली लीटर गाय के दूध में 8-10 लहसुन की कलियां डालकर उबालें। गाढ़ा होने पर रोगी को पिलाएं। बीमारी में आराम मिलेगा।

— साउथ और औरत उबालकर उसका पानी पीने से लकवे में काफी लाभ होता है।

— एक चम्मच कपास की जड़ का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है।

— लहसुन के 5-6 कच्ची कलियों को पीसकर शहद में मिलाकर चाटें।

— उड़द+ कौंच के बीज+ एरंड की जड़+ बला+ हींग+ सेंधा नमक और थोड़ा शहद सभी बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाएं और रोगी को पिलाएं ।बीमारी में आराम मिलेगा।

— 250 ग्राम सरसों के तेल में थोड़ी काली मिर्च पीसकर डालें और मालिश करें।

— सन के बीजों का चूर्ण शहद में मिलाकर रोगी को चटायें ,लाभ मिलेगा।

कुचले के पत्तों, सांभर का सींग तथा सौंठ तीनों बराबर मात्रा में लेकर पानी में पिएं और लकवे वाले स्थान पर लगाएं।

— तुलसी के 8-10 पत्ते, सेंधा नमक और दही की चटनी बनाकर लकवे वाले स्थान पर लेख करें।

“मिर्गी के घरेलू उपचार: जाने इस बीमारी के समान लक्षण और उपाय”

मिर्गी के घरेलू उपचार:

शारीरिक तथा मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को मिर्गी अधिकांश रूप से होती है। अत्यधिक शराब पीना, अत्यधिक शारीरिक श्रम, सिर में चोट लगने से यह बीमारी हो सकती है। इस रोग में अचानक से दौरा पड़ता है और रोगी गिर पड़ता है। हाथ और गर्दन अकड़ जाते हैं, पलकें एक जगह रुक जाती है, रोगी हाथ पैर पटकता है, जीभ अकड़ जाने से बोली नहीं निकलती, मुंह में पीला झाग निकलता है। दांत किटकिटाना और शरीर में कंपकपी होना समान रूप से देखा जाता है। चारों तरफ या तो काला अंधेरा दिखाई देता है या सब चीजें सफेद दिखाई देती हैं। इस तरह के दौड़े 10 से 15 मिनट से लेकर 1 से 2 घंटे तक के भी हो सकते हैं। पुनः रोगी को जब होश आता है तब थका हुआ होता है और सो जाता है। इसके घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं:-

मिर्गी के दौरा पड़ने पर

दौरा पड़ने पर रोगी को दाईं करवट लेटाएं ताकि उसके मुंह से सभी झाग आसानी से निकल जाएं । दौरा पड़ने के समय रोगी को कुछ भी ना खिलाएं । बल्कि दौरे के समय अमोनिया या चुने की गंध सूंघने चाहिए इससे उसकी बेहोशी दूर हो सकती है।

ब्राह्मी बूटी

ब्राह्मी बूटी का रस एक चम्मच प्रतिदिन सुबह शाम पिलायें। 20 ग्राम शंखपुष्पी का रस और दो ग्राम कुटकी का चूर्ण शहद के साथ मिलकर चाटें।

नीम की कोमल पतियों,

नीम की कोमल पतियों, अजवाइन और काला नमक इन सबको पानी में पीसकर टेस्ट बनाकर सेवन करें। शरीफ के पत्तों के रस की कुछ बंदे रोगी के नाक में डालने से जल्दी होश आता है।

नींबू के रस

नींबू के रस में हींग मिलाकर चाटने से काफी लाभ होता है। तुलसी के चार से पांच पत्ते कुचलकर उस में कपूर मिलाकर रोगी को सुंघाएं।

प्याज का रस पानी में घोलकर पिलाने से भी काफी आराम मिलता है।

मेहंदी के पत्तों का रस दूध में मिलाकर पीने से काफी लाभ होता है।

शारीरिक तथा मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को मिर्गी अधिकांश रूप से होती है। अत्यधिक शराब पीना, अत्यधिक शारीरिक श्रम, सिर में चोट लगने से यह बीमारी हो सकती है। इस रोग में अचानक से दौरा पड़ता है और रोगी गिर पड़ता है। हाथ और गर्दन अकड़ जाते हैं, पलकें एक जगह रुक जाती है, रोगी हाथ पैर पटकता है, जीभ अकड़ जाने से बोली नहीं निकलती, मुंह में पीला झाग निकलता है। दांत किटकिटाना और शरीर में कंपकपी होना समान रूप से देखा जाता है। चारों तरफ या तो काला अंधेरा दिखाई देता है या सब चीजें सफेद दिखाई देती हैं। इस तरह के दौड़े 10 से 15 मिनट से लेकर 1 से 2 घंटे तक के भी हो सकते हैं। पुनः रोगी को जब होश आता है तब थका हुआ होता है और सो जाता है।

— दौरा पड़ने पर रोगी को दाईं करवट लेटाएं ताकि उसके मुंह से सभी झाग आसानी से निकल जाएं । दौरा पड़ने के समय रोगी को कुछ भी ना खिलाएं । बल्कि दौरे के समय अमोनिया या चुने की गंध सूंघने चाहिए इससे उसकी बेहोशी दूर हो सकती है।

— ब्राह्मी बूटी का रस एक चम्मच प्रतिदिन सुबह शाम पिलायें।

— 20 ग्राम शंखपुष्पी का रस और दो ग्राम कुटकी का चूर्ण शहद के साथ मिलकर चाटें।

— नीम की कोमल पतियों, अजवाइन और काला नमक इन सबको पानी में पीसकर टेस्ट बनाकर सेवन करें।

— शरीफ के पत्तों के रस की कुछ बंदे रोगी के नाक में डालने से जल्दी होश आता है।

— नींबू के रस में हींग मिलाकर चाटने से काफी लाभ होता है।

– तुलसी के चार से पांच पत्ते कुचलकर उस में कपूर मिलाकर रोगी को सुंघाएं।

— प्याज का रस पानी में घोलकर पिलाने से भी काफी आराम मिलता है।

— मेहंदी के पत्तों का रस दूध में मिलाकर पीने से काफी लाभ होता है।

“पित्त प्राकृतिक और वात प्राकृतिक व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सुझाव”

man doing yoga
man doing yoga
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(पित्त के प्रभाव वाले लोगों की दिनचर्या 14 वर्ष से 60 वर्ष तक)

1.–14 वर्ष से लेकर 60 वर्षों तक पूरा शरीर पित्त के प्रभाव में होता है। पित्त के लोगों का कफ कम हो जाता है और बात बहुत कम होता है। पित्त प्राकृति के लोगों की नींद 6 घंटे कम से कम और अधिक से अधिक 8 घंटे होनी चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त में पित्त प्रकृति के लोगों का जगना बहुत आवश्यक है अथवा सुबह 4:00 बजे जाग जाएं।

अर्जुन के पेड़ की दातुन

2.–पित्त प्रकृति के लोगों को दांत कसाय अथवा कड़वी और तिक्त वाली वस्तुओं से साफ करना चाहिए अथवा नीम की दातुन करें। मदार, बाबुल, अर्जुन, आम, अमरूद आदि की दातुन करें। जनवरी से बरसात आने तक बरसात शुरू होने के बाद नहीं। इस समय में नीम की दातुन पित्त को संतुलित करेगी इस समय में नीम के अतिरिक्त मदार या बबूल की दातुन भी कर सकते हैं। बरसात के मौसम में आम की दातुन या अर्जुन के पेड़ की दातुन ठंडी के मौसम में अमरूद या जामुन की दातुन करें। पूरे साल भी नीम की दातुन कर सकते हैं लेकिन तीन-तीन महीने के बाद कुछ दिन छोड़कर और उन दिनों में गाय के गोबर की राख का दंत मंजन कर ले। दूसरा दंत मंजन किसी भी क्षेत्र की तासीर के हिसाब से तेल+ हल्दी+ नमक मिलाकर दांत साफ कर सकते हैं।

healthy woman relaxation garden
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गाय के गोबर का दंत मंजन

3.–गाय के गोबर की राख+ कपूर+ फिटकरी+ नमक मिलाकर, गाय के गोबर का दंत मंजन बना सकते हैं। दंत मंजन के लिए बारीक त्रिफला चूर्ण पीसें और थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर करें। खाने के लिए त्रिफला चूर्ण थोड़ा मोटा पीसें। ऐसे ही 8 से 10 तरह के मंजन है और 12 तरह की दातुन है। सुबह-सुबह की लार पित्त को संतुलित करती है। अतः इसे दातुन करते समय पेट में जाने देना चाहिए। पेस्ट में सेक्रिन के रूप में चीनी होती है। चीनी और पित्त में बनती नहीं है। सुबह-सुबह मीठा (चीनी के रूप में यह सेक्रिन के रूप में) यदि मुंह में लगातार जाता है तो बहुत जल्दी दांत खराब होंगे।

4.–सभी पेस्ट मरे हुए जानवरों की हड्डियों से बन रहे हैं। कोलगेट मरे हुए शुगर की हड्डियों से और पेप्सोडेंट बन रहा है। मरे हुए गाय की हड्डियों से तथा क्लोजअप और फांरहंस बन रहे हैं बकरे और बकरियों की हड्डियों से।

woman slicing gourd
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वित्त प्राकृति के लोगों को मालिश और व्यायाम दोनों करना चाहिए।

5.—त्रिफला चूर्ण का दत्त मंजन किसी भी ऋतु में किया जा सकता है। वित्त प्राकृति के लोगों को मालिश और व्यायाम दोनों करना चाहिए। बात के रोगियों के लिए मालिश पहले व्यायाम बाद में। पित्त की प्रधानता वाले व्यक्तियों के लिए व्यायाम पहले मालिश बाद में। शरीर में बगल में पसीना आने पर बयान बंद कर दें।

6.–भारत की जलवायु के हिसाब से यहां रोज सुबह-सुबह दौड़ना नहीं चाहिए। क्योंकि दौड़ते समय वात बहुत प्रबल होता है। भारत वात प्रकृति का देश है। यानी रुक्ष देश है जहां सुखी हवा चलती है। ऐसे व्यायाम जो धीरे-धीरे किए जाते हैं जैसे भारत की प्रकृति के हिसाब से सूर्य नमस्कार जो सबसे अच्छा है इसके अलावा छोटे छोटे स्तर के कोई भी व्यायाम जिसमें पसीना ना निकले। माताओं को व्यायाम की जरूरत नहीं है यदि वह रसोई घर के काम में लगी हैं। खास कर उनके लिए जो माताएं चक्की चलाती हैं या सिलबट्टे पर चटनी बनाती हैं।बहनों के लिए बहुत अच्छा व्यायाम है कमर से आगे की तरफ झुकना, जितना झुक पायें , उतनी ही झुकें।

7.–माताओं और बहनों के लिए भी मालिश जरूरी है। शरीर मालिश के साथ-साथ सिर की, कान की और तलवों की ज्यादा मालिश करनी है। मालिश के बाद स्नान करना है। स्नान उबटन आदि से करना है। इसके बाद भोजन तथा भोजन के बाद 20 मिनट का विश्राम या 10 मिनट वज्रासन। फिर दिन के कार्यकलाप उसके बाद शाम को 6:00 से 7:00 का भोजन, फिर 2 घंटे बाद सोना, पित्त वालों का इसी प्रकार का नियम है।